मध्यप्रदेश

अकादमी की पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंच रही है भारतीय ज्ञान परंपरा : मंत्री परमार

भोपाल 

हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकों के माध्यम से महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा का शाश्वत ज्ञान पहुंच रहा है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित हिन्दी ग्रंथ अकादमी के प्रबंधक मंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यह बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि इन पुस्तकों में निहित ज्ञान जहां एक ओर विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की नींव तैयार करेगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें अच्छे नागरिक और बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी अग्रसर करेगा।

मंत्री परमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्नातक प्रथम वर्ष के लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकों में नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें प्राप्त हो सकें।

बैठक में मंत्री परमार ने विद्यार्थियों में घटती अध्ययन रुचि पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल डिस्टर्बेंस के इस दौर में विद्यार्थी अपना अधिकतर समय मोबाइल और कंप्यूटर पर व्यतीत कर रहे हैं, जिससे अध्ययन में उनकी रुचि कम होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में पुनः अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करें। मंत्री परमार ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग के लाखों विद्यार्थियों तक हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकें पहुंचती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकों के निर्माण में मानक प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा विद्यार्थियों से फीडबैक प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली भी विकसित की जानी चाहिए, जिससे उनकी अपेक्षाओं के अनुसार पुस्तकों में आवश्यक सुधार किए जा सकें।

बैठक में अकादमी के संचालक डॉ. अशोक कड़ेल ने अकादमी के वार्षिक बजट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष की लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें महाविद्यालयों को प्रेषित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अकादमी द्वारा द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन की प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही ये पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक में पुस्तकों के कागज की गुणवत्ता बढाने पर भी सहमति जताई गई। निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष से पुस्तकों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण कागज पर प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अकादमी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक निर्णय लिए गए।

बैठक में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, मनोनीत सदस्य, उच्च शिक्षा मंत्री के ओएसडी डॉ. भरत व्यास,हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान एवं सहायक संचालक रामविश्वास कुशवाहा सहित उच्च शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

अकादमी की पुस्तकों का किया विमोचन

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित, स्नातक प्रथम वर्ष की निम्न पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें “व्यावसायिक संगठन एवं संचार” (लेखक: डॉ. राकेश खंड, डॉ. दिनेश दवे, डॉ. राजीव नयन, डॉ. प्रज्ञा यादव) “भारत का इतिहास (606 से 1205 ई. तक)” (लेखक: स्नेहा खरे)) “राजनीति सिद्धांत” (लेखक: डॉ. उत्तम सिंह चौहान, डॉ. पुनित प्रताप पाण्डेय, डॉ. मनीष दुबे, डॉ. मंगला गौरी) तथा “भारतीय समाज एवं संस्कृति” (लेखक: डॉ. आलोक कुमार निगम) पुस्तक शामिल रही।

 

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