मध्यप्रदेश

पशुओं में नस्ल सुधार का कार्य बेहतर ढंग से करें : प्रमुख सचिव उमराव

भोपाल

प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी  उमाकांत उमराव औचक भ्रमण पर जबलपुर पहुंचे। यहां पर पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय सभागार में पशु चिकित्सकों के साथ बैठक की। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर जबलपुर  राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।

प्रमुख सचिव  उमराव ने बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रकरणों में विस्तार से एक-एक पशु चिकित्सक से विस्तृत चर्चा कर लंबित प्रकरण बैंकों से स्वीकृत करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले के अंतर्गत चयनित क्षीरधारा ग्रामों में चलाई जा रही गतिविधियों एवं दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान पर भी चर्चा की। अवार्णित पशुओं में नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों की प्रशंसा की

प्रमुख सचिव  उमराव ने कृत्रिम गर्भाधान कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की प्रशंसा की। साथ ही न्यूनतम कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार करने के निर्देश दिए। सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों एवं मैत्री कार्यकर्ताओं से फील्ड में कार्य करने में आ रही कठिनाइयों एवं उनके निराकरण पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख सचिव  उमराव ने पाटन के क्षीर धारा ग्राम के पशु चिकित्सालय नुनसर का औचक निरीक्षण भी किया।

बैठक में संयुक्त संचालक पशुपालन एवं डेयरी जबलपुर डॉ. व्ही.एन. मिश्रा एवं उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. प्रफुल्ल मून भी उपस्थित रहे।

मंडला जिले के क्षीरधारा अंतर्गत चयनित ग्राम मैली का किया भ्रमण

प्रमुख सचिव  उमराव मंडला जिले के ग्राम मैली पहुंचे। क्षीरधारा योजना अंतर्गत चयनित मैली ग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान वे पशुपालक इंद्रकुमार सिंगरौरे, गौरीशंकर सिंगरौरे एवं कृष्णकांत झरिया, ग्राम बिनेका में शिवा चंदरोल, अशोक चंदरोल के घर पहुंचकर भेंट की। पशुपालकों को चयनित सीमेंन के उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही पशुओं के नस्ल सुधार में इसका अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर दिया। अधिकारियों को सघन बधियाकारण एवं बांझ निवारण शिविर लगाने को कहा। जिससे पशुओं में नस्ल सुधार किया जा सके। साथ ही दुग्ध उत्पादन में वृद्धि भी हो सके।।

 

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